अंतर में आत्मा मंगलस्वरुप है. आत्मा का आश्रय करनेसे मंगल स्वरुप पर्याय प्रगट होंगी. आत्मा ही मंगल, उत्तम और नमस्कार करने योग्य है – इस प्रकार यथार्थ प्रतीति कर और उसीका ध्यान कर तो मंगलता एवं उतमता प्रगट होगी.
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अंतर में आत्मा मंगलस्वरुप है. आत्मा का आश्रय करनेसे मंगल स्वरुप पर्याय प्रगट होंगी. आत्मा ही मंगल, उत्तम और नमस्कार करने योग्य है – इस प्रकार यथार्थ प्रतीति कर और उसीका ध्यान कर तो मंगलता एवं उतमता प्रगट होगी.