Mangalwani

वर्तमान पर्याय का यथार्थ ज्ञान किया – यह कब कहलायेगा?
पूज्य गुरुदेवश्री – “स्व तथा पर पदार्थोकी वर्तमान अवस्था का सच्चा ज्ञान किया” यह कब कहलायेगा? – जब उस-उस पदार्थ का स्वाभाव जाने तो जीव अपना ज्ञान अपने ज्ञाता स्वाभावके आश्रय से होता है; परन्तु इन्द्रियों के तथा पर पदार्थो के अवलंबन से नहीं होता – ऐसा मानता है, वह जीव पर पदार्थोकी पर्यायो को भी उनके द्रव्य के आश्रय से (उत्पन्न) हुई मानता है: परन्तु अन्य के आश्रय से (उत्पन्न) हुई नहीं मानता है. वे-वे पर्यायें अपने-अपने द्रव्य के आश्रय से होती है, वह अन्य के कारण नहीं है. निगोद से ले कर सभी जीव अपने आत्मा से जानते है; परन्तु इन्द्रियों से नहीं जानते.

— पुरुषार्थ प्रेरणामूर्ति, परमपूज्य सदगुरुदेवश्री, अलिंगग्रहणके २० बोल पर प्रवचन में से